देवताओं की घाटी -उत्तराखंड का प्राचीन मंदिर समूह जागेश्वर धाम, जानिए क्यों है खास

जागेश्वर धाम, उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित एक प्राचीन मंदिर परिसर है जो भगवान शिव को समर्पित है । इसे 125 से अधिक मंदिरों का समूह माना जाता है, जिनमें से कुछ 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच के हैं। यह भारत के सबसे बड़े मंदिर समूहों में से एक है और इसे “देवताओं की घाटी” के रूप में भी जाना जाता है। 

मुख्य बातें:
  • शिव मंदिर:
    जागेश्वर धाम में भगवान शिव के कई मंदिर हैं, जिनमें जागनाथ मंदिर (ज्योतिर्लिंग), मृत्युंजय मंदिर, हनुमान मंदिर, सूर्य मंदिर, नीलकंठ मंदिर, नवग्रह मंदिर, पुष्टि माता मंदिर, लकुलेश मंदिर, केदारनाथ मंदिर, नवदुर्गा मंदिर और बटुक भैरव मंदिर शामिल हैं। 

  • स्वयंभू लिंग:
    यहां का मुख्य मंदिर, जागेश्वर मंदिर, एक स्वयंभू लिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसे नागेश दारुकावन के नाम से भी जाना जाता है। 

  • मंदिरों का समूह:
    जागेश्वर धाम में लगभग 124 छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिनमें 108 शिवलिंग और 17 अन्य देवी-देवताओं के मंदिर हैं। 

  • ऐतिहासिक महत्व:
    मंदिर परिसर 7वीं से 14वीं शताब्दी के बीच का है, जो कत्यूरी काल के दौरान बनाया गया था। 

  • वास्तुकला:
    जागेश्वर मंदिर की वास्तुकला नागर शैली में है और यह अपनी जटिल नक्काशी और मूर्तियों के लिए जाना जाता है। 

  • लिंग पूजा का आरंभ:
    माना जाता है कि जागेश्वर धाम वह पहला स्थान है जहां लिंग के रूप में शिव की पूजा शुरू हुई थी। 

  • कैसे पहुंचे:
    जागेश्वर धाम अल्मोड़ा से लगभग 34 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम और हल्द्वानी हैं, और निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। 

  • वर्ष भर खुला:
    मंदिर वर्ष के 365 दिन खुला रहता है। 

जागेश्वर धाम का महत्व:
जागेश्वर धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी रखता है। यह मंदिर समूह उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है और इसे भगवान शिव की तपस्थली माना जाता है।
Hind News 9
Author: Hind News 9

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