पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहली बार ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सफलता—कॉसमॉस हॉस्पिटल, मुरादाबाद ने रचा इतिहास

मुरादाबाद संवाददाता

कॉसमॉस हॉस्पिटल, मुरादाबाद ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। यह सफलता न केवल अस्पताल के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह जटिल ट्रांसप्लांट एक ऐसे मरीज में किया गया जो गंभीर रक्त कैंसर (मल्टीपल मायलोमा) से पीड़ित था। अब तक इस तरह के उपचार के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यह उन्नत सुविधा मुरादाबाद में ही उपलब्ध हो गई है।

हॉस्पिटल के विशेषज्ञों के अनुसार, मल्टीपल मायलोमा एक गंभीर रक्त कैंसर है, जो बोन मैरो को प्रभावित करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। इसके कारण मरीज को बार-बार संक्रमण, हड्डियों में दर्द और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।

इस जटिल ट्रांसप्लांट प्रक्रिया का सफल नेतृत्व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी एवं उनकी टीम ने किया। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में मरीज के अपने स्वस्थ स्टेम सेल्स का उपयोग किया जाता है। इसमें कीमोथेरेपी के बाद स्टेम सेल्स को पुनः शरीर में स्थापित किया जाता है, जिससे बोन मैरो का पुनर्निर्माण होता है।

अस्पताल की विशेष टीम के अनुसार, मरीज ने लगभग 10 दिनों के भीतर सफल रिकवरी प्राप्त की और उपचार के दौरान कोई गंभीर जटिलता या संक्रमण सामने नहीं आया। यह सफलता दर्शाती है कि अब उच्च स्तरीय कैंसर उपचार और ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रियाएं मुरादाबाद जैसे शहरों में भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संभव हैं।

किन मरीजों के लिए उपयोगी है यह उपचार?

यह उपचार मुख्य रूप से मल्टीपल मायलोमा, कुछ प्रकार के लिंफोमा और चयनित रक्त कैंसर के मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी असामान्य लक्षण—जैसे लगातार कमजोरी, हड्डियों में दर्द या बार-बार संक्रमण—को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नई शुरुआत है। उनका उद्देश्य है कि आधुनिक और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं किफायती दरों पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हों, ताकि मरीजों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।

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Author: Hind News 9

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