धनबाद
झारखंड में शराब घोटाले का एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें 802 बोतल शराब गायब होने का दोष चूहों पर मढ़ा गया था। दावा किया गया था कि चूहों ने शराब की बोतलों के ढक्कन कुतरे, पूंछ डुबाई और उसे चाट-चाट कर शराब गटक गए! लेकिन अब जांच में चूहे निर्दोष पाए गए हैं। असल गुनहगार निकले इंसान!
क्या है पूरा मामला?
- 1 जुलाई 2025 को जब झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) ने शराब दुकानों को टेकओवर किया, तब धनबाद की बलियापुर और प्रधानखंडा दुकानों में स्टॉक की जांच हुई।
- 802 बोतलें कम पाई गईं। बोतलों के ढक्कन में छेद मिले और शराब नदारद।
- दुकानदारों ने कहा – चूहे पी गए शराब!
तर्क यह दिया गया कि चूहे ढक्कन कुतर कर शराब पी गए। जांच में हुआ खुलासा: जांच मंत्री योगेंद्र प्रसाद के आदेश पर हुई।पता चला कि आरके एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, जिसे मैनपावर सप्लाई का ठेका मिला था, वही असली दोषी है।
- चूहों को दोषमुक्त कर दिया गया, अब कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी।
धनबाद के सहायक आयुक्त रामलीला रवानी ने कहा:
“802 बोतल की भरपाई एजेंसी करेगी। फ्रेश माल दिया गया था, फ्रेश माल वापस चाहिए।”
कंपनी की सफाई:
नवीन सिंह, अधिकारी, आरके एंड कंपनी:
“रास्ते में पेटी टूट जाती है, ढक्कन कुतर सकते हैं चूहे… स्टॉक कम मिला तो भरपाई हम ही करेंगे।”
भविष्य की योजना: नई शराब नीति
- 1 सितंबर 2025 से झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होगी।
- संचालन निजी शराब कारोबारियों को दिया जाएगा।
- सरकार ने 7 महीनों में ₹2402 करोड़ का राजस्व लक्ष्य तय किया है।
इससे पहले भी लगे हैं चूहों पर आरोप:
- अप्रैल 2024: 10 किलो भांग और 9 किलो गांजा गायब, चूहों को बताया गया दोषी।
आईएएस अफसर जेल में, ACB कर रही जांच
- पूर्व उत्पाद सचिव विनय चौबे और पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश जेल में।
- आरोप – नई शराब नीति में गड़बड़ी, राज्य को ₹38 करोड़ से अधिक का नुकसान।
पूर्व सीएम रघुवर दास का आरोप:
“यह घोटाला ₹600–700 करोड़ का है, हेमंत सोरेन ने खुद को बचाने के लिए अफसरों को बलि का बकरा बनाया।













