मुरादाबाद
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, काम, मनोरंजन और सोशल मीडिया—हर जगह स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल अब एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप लेता जा रहा है। खासकर बच्चे और युवा लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने के कारण आंखों की बीमारियों और मानसिक तनाव की चपेट में आ रहे हैं।
बच्चों में बढ़ती चिंता
छोटे बच्चे घंटों मोबाइल, टैबलेट और टीवी स्क्रीन पर कार्टून, गेम्स और वीडियो देखने में समय बिता रहे हैं। लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों की मांसपेशियों पर ज़रूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे कम उम्र में ही चश्मा लगने, आंखों में जलन, पानी आना और सिरदर्द जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
इसके साथ ही बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और नींद न आने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं, जो मानसिक तनाव का संकेत हैं।
बड़ों पर भी पड़ रहा गंभीर असर
ऑफिस वर्क, ऑनलाइन मीटिंग, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के कारण बड़े लोग भी दिन का अधिकतर समय मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर बिता रहे हैं। इससे डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों में सूखापन, धुंधला दिखना और लगातार सिर दर्द जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
मानसिक रूप से भी लोग तनाव, बेचैनी और अनिद्रा का शिकार हो रहे हैं। स्क्रीन की नीली रोशनी (Blue Light) दिमाग पर असर डालती है, जिससे नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है।
आंखों और दिमाग पर स्क्रीन का प्रभाव
आंखों में जलन और सूखापन
धुंधला दिखाई देना
सिर दर्द और माइग्रेन
नींद की कमी
बच्चों में एकाग्रता की समस्या
मानसिक तनाव और अवसाद की संभावना
बचाव ही है सबसे बड़ा इलाज
डॉ. विराग श्रीवास्तव के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें
बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें
मोबाइल आंखों से उचित दूरी पर रखें
रात में सोने से कम से कम 1 घंटे पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें
समय-समय पर आंखों की जांच कराएं
बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें













