मुरादाबाद। बदलते मौसम के साथ सितंबर के बाद तापमान में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। ऐसे में मोतियाबिंद के ऑपरेशन को लेकर मरीजों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ठंडे मौसम में सर्जरी कराना अधिक सुविधाजनक होता है? इसी विषय पर भव्या हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. विराग श्रीवास्तव ने बताया कि मौसम अपने आप में ऑपरेशन का एकमात्र आधार नहीं है, लेकिन अपेक्षाकृत सुहावना मौसम ऑपरेशन के बाद की देखभाल को कई मरीजों के लिए आसान बना सकता है।

डॉ. विराग श्रीवास्तव के अनुसार, मोतियाबिंद की सर्जरी आधुनिक तकनीक से सामान्यतः कम समय में की जाने वाली प्रक्रिया है और अधिकांश मरीज जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या की ओर लौट सकते हैं। हालांकि ऑपरेशन के बाद आंख को धूल, धुएं, तेज हवा, पानी और आंख को रगड़ने जैसी स्थितियों से बचाना महत्वपूर्ण होता है।
सितंबर के बाद मौसम में गर्मी और उमस कम होने से कई मरीजों को ऑपरेशन के बाद बाहर निकलने और निर्धारित सावधानियां बरतने में अपेक्षाकृत सुविधा महसूस हो सकती है। खासकर शुरुआती दिनों में धूल-धुएं से बचाव और आंखों को न छूना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ संस्थानों की पोस्ट-ऑपरेटिव सलाह में भी धूल भरे वातावरण से बचने, आंख न रगड़ने तथा बाहर निकलते समय आवश्यकता अनुसार चश्मे या सनग्लास का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
डॉ. विराग श्रीवास्तव कहते हैं कि “मोतियाबिंद के मरीजों को केवल मौसम देखकर ऑपरेशन टालना नहीं चाहिए। सही समय का निर्धारण आंखों की जांच, मोतियाबिंद की स्थिति, मरीज की उम्र, अन्य बीमारियों और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद चिकित्सक द्वारा दी गई आई ड्रॉप्स का नियमित इस्तेमाल, आंख को न रगड़ना और कुछ समय तक भारी काम, धूल-मिट्टी तथा तैराकी जैसी गतिविधियों से बचना जरूरी है।
मोतियाबिंद के मरीज इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
यदि धुंधला दिखाई देना बढ़ रहा हो, रात में रोशनी के आसपास चमक या परेशानी बढ़ रही हो, पढ़ने या रोजमर्रा के काम में दिक्कत आने लगी हो, तो आंखों की जांच कराना उचित है। ऑपरेशन की आवश्यकता और सही समय का निर्णय विशेषज्ञ जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।













